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Article May 26, 2026 14 views

क्या पत्थरचट्टा (Patharchatta) से पित्त की पथरी पिघल सकती है? जानिए इस जानलेवा भ्रम का सच

क्या पत्थरचट्टा (Patharchatta) से पित्त की पथरी पिघल सकती है? जानिए इस जानलेवा भ्रम का सच

हमारे देश में जब भी किसी को 'पथरी' (Stone) की बीमारी होती है, तो सबसे पहले घरेलू नुस्खे आजमाने की सलाह दी जाती है। इनमें सबसे ऊपर नाम आता है—पत्थरचट्टा (Bryophyllum pinnatum) के पौधे का

इंटरनेट और सोशल मीडिया पर सैकड़ों ऐसे वीडियो मिल जाएंगे जो दावा करते हैं कि पत्थरचट्टा चबाने से पथरी पानी बनकर बह जाएगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह अधूरा सच किसी की जान भी ले सकता है? आज हम वैज्ञानिक तथ्यों के साथ इस भ्रम को तोड़ेंगे और जानेंगे कि पित्त की थैली (Gallbladder) की पथरी का समय पर इलाज न कराने के क्या गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

सबसे बड़ा भ्रम: गुर्दे (Kidney) और पित्त (Gallbladder) की पथरी का अंतर

लोग सबसे बड़ी गलती यह करते हैं कि वे किडनी स्टोन और गॉलब्लैडर स्टोन को एक ही समझ लेते हैं। जबकि दोनों की बनावट, स्थान और इलाज पूरी तरह अलग हैं:

 

गुर्दे की पथरी (Kidney Stone): यह मुख्य रूप से कैल्शियम ऑक्सलेट या यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स से बनती है। यह हमारे यूरिनरी ट्रैक्ट (मूत्र मार्ग) में होती है। चूंकि यह रास्ता खुला होता है, इसलिए पत्थरचट्टा जैसी कुछ जड़ी-बूटियाँ (जो मूत्रवर्धक या Diuretic होती हैं) ज्यादा पेशाब बनाकर छोटी पथरी को शरीर से बाहर निकाल सकती हैं।

पित्त की पथरी (Gallbladder Stone): यह मुख्य रूप से कोलेस्ट्रॉल और बिलिरुबिन (Bilirubin) के जमने से बनती है। पित्त की थैली एक बंद थैली जैसी होती है, जिसका रास्ता बेहद संकरा (Cystic Duct) होता है। चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) में ऐसी कोई भी दवा, जड़ी-बूटी या पत्थरचट्टा नहीं है जो पित्त की पथरी को पिघला सके।

कड़वा सच: यदि कोई दावा करता है कि उसने पत्थरचट्टा से पित्त की पथरी ठीक कर दी, तो वह सरासर झूठ बोल रहा है या उसे खुद बीमारी की सही समझ नहीं है।

समय पर ऑपरेशन न कराने के गंभीर परिणाम (Consequences of Delayed Surgery)

जब लोग पत्थरचट्टा या अन्य अप्रमाणित दवाओं के चक्कर में पड़कर गॉलब्लैडर के ऑपरेशन (Cholecystectomy) को टालते रहते हैं, तो पित्त की थैली के अंदरूनी हालात बिगड़ने लगते हैं। समय पर इलाज न मिलने से निम्नलिखित जानलेवा स्थितियां पैदा हो सकती हैं:

 

1. एक्यूट कोलेसिस्टाइटिस (Acute Cholecystitis - पित्त की थैली में भयंकर सूजन): पथरी जब थैली के मुंह को ब्लॉक कर देती है, तो पित्त (Bile) अंदर ही जमा होने लगता है। इससे थैली में भयंकर सूजन, मवाद (Pus) भरना और असहनीय दर्द शुरू हो जाता है।

 

2. गॉलब्लैडर का फटना (Gallbladder Perforation): सूजन और मवाद के बढ़ने से पित्त की थैली सड़ सकती है और फट सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो जहरीला पित्त और इन्फेक्शन पूरे पेट में फैल जाता है, जो एक मेडिकल इमरजेंसी है और इसमें जान जाने का खतरा बहुत ज्यादा होता है।

 

3. पीलिया (Jaundice) और पैंक्रियाटाइटिस (Pancreatitis): यदि पथरी थैली से फिसलकर मुख्य पित्त नली (Common Bile Duct) में चली जाए, तो यह लिवर से आने वाले रास्ते को ब्लॉक कर देती है, जिससे गंभीर पीलिया हो जाता है। इसके अलावा, यह पैंक्रियाज (अग्न्याशय) की नली को भी ब्लॉक कर सकती है, जिससे 'पैंक्रियाटाइटिस' नामक जानलेवा बीमारी होती है।

 

4. कैंसर का खतरा (Gallbladder Cancer): यदि बड़ी पथरी सालों-साल पित्त की थैली के अंदर पड़ी रहे, तो वह उसकी अंदरूनी दीवारों को लगातार छीलती और नुकसान पहुँचाती रहती है। यह क्रॉनिक इरिटेशन आगे चलकर गॉलब्लैडर कैंसर का रूप ले सकती है।

सही समाधान क्या है?

यदि अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) में आपके पित्त की थैली में पथरी आई है और आपको दर्द, अपच या उल्टी जैसे लक्षण हैं, तो झाड़-फूंक या पत्थरचट्टा में समय बर्बाद न करें।

 

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी (दूरबीन द्वारा ऑपरेशन): आजकल यह बेहद आसान और सुरक्षित तकनीक है। इसमें पेट पर बिना कोई बड़ा चीरा लगाए, छोटे से छेद के जरिए पित्त की थैली को पथरी समेत बाहर निकाल दिया जाता है। मरीज अगले ही दिन से अपने सामान्य काम कर सकता है।

 

निष्कर्ष (Conclusion)

आयुर्वेद और जड़ी-बूटियों का अपना महत्व है, लेकिन हर बीमारी का इलाज उनसे संभव नहीं है। पत्थरचट्टा किडनी की पथरी में कुछ हद तक मददगार हो सकता है, लेकिन गॉलब्लैडर स्टोन का एकमात्र इलाज सर्जरी ही है। सही समय पर लिया गया डॉक्टरों का परामर्श आपको एक बड़ी मुसीबत और जिंदगी के खतरे से बचा सकता है। भ्रम से बचें, वैज्ञानिक इलाज चुनें!

अंगारा लाल

Content Creator & Artist

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