Stay Connected

Article Jul 12, 2026 65 views

भक्ति और झूठे विज्ञापन: क्या हम सितारों को भगवान मानकर गलती कर रहे हैं?

भक्ति और झूठे विज्ञापन: क्या हम सितारों को भगवान मानकर गलती कर रहे हैं?

आज सुबह उठते ही आपने सोशल मीडिया पर किसी मशहूर इन्फ्लुएंसर को एक जादुई चाय या वेट-लॉस पिल का तारीफों के पुल बांधते देखा होगा। टीवी खोलते ही कोई बड़ा सुपरस्टार आपको जुबां केसरी करने की सलाह दे रहा होगा या कोई नामी क्रिकेटर आपको पैकेटबंद चिप्स और कोल्ड-ड्रिंक पीने के लिए उकसा रहा होगा।

 

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि करोड़पति और अपनी फिटनेस के लिए दिन-रात एक करने वाले ये सितारे क्या खुद इन चीजों का इस्तेमाल करते हैं? जवाब है—बिल्कुल नहीं।

 

विज्ञापन का मायाजाल और दोगलापन

 

यह आज के समय का सबसे बड़ा खुला रहस्य है। जो एक्टर्स स्क्रीन पर चमकती त्वचा के लिए ₹10 की क्रीम का प्रचार करते हैं, वे खुद लाखों के इंटरनेशनल ट्रीटमेंट्स लेते हैं। जो स्पोर्ट्स स्टार्स युवाओं को एनर्जी ड्रिंक्स या जंक फूड खाने की प्रेरणा देते हैं, उनकी अपनी डाइट चार्ट से शुगर और मैदा कोसों दूर रहता है।

यहाँ सवाल उनके कमाने पर नहीं है, सवाल उस नैतिक जिम्मेदारी पर है जो एक पब्लिक फिगर होने के नाते उनकी बनती है। पैसे के लिए किसी भी ऐसी चीज को 'अमृत' बताकर बेच देना जिसे वे अपने बच्चों को छूने तक न दें, आम जनता के भरोसे के साथ एक बड़ा धोखा है।

 

भारत में 'भगवान' का दर्जा और अंधी दीवानगी

 

दुनिया के बाकी देशों में एक्टर्स और इन्फ्लुएंसर्स को सिर्फ एक एंटरटेनर या कलाकार के रूप में देखा जाता है। लेकिन भारत में कहानी अलग है। यहाँ सिनेमा और सोशल मीडिया के किरदारों को सीधे 'भगवान' के सिंहासन पर बिठा दिया जाता है। लोग उनके नाम पर मंदिर बनवाते हैं, उनकी फिल्मों की रिलीज पर दूध से उनका राज्याभिषेक करते हैं और उनके हर एक शब्द को पत्थर की लकीर मान लेते हैं।

इस अंधी दीवानगी का नतीजा यह होता है कि आम जनता, खासकर युवा, तार्किक रूप से सोचना बंद कर देते हैं। अगर उनके पसंदीदा स्टार ने किसी सट्टेबाजी (betting) ऐप या हानिकारक गुटखे का विज्ञापन किया, तो प्रशंसक उसके पीछे के नुकसान को नजरअंदाज कर उसे अपनाने लगते हैं। हम यह भूल जाते हैं कि वे पर्दे पर जो दिखते हैं, असल जिंदगी में वैसे बिल्कुल नहीं हैं।

 

सोच बदलने की ज़रूरत: वे कलाकार हैं, भगवान नहीं

 

हमे एक समाज के तौर पर परिपक्व (mature) होना पड़ेगा। इन्फ्लुएंसर्स और एक्टर्स को उनके काम के लिए सराहिए, उनके अभिनय का आनंद लीजिए, लेकिन उन्हें अपने जीवन का मार्गदर्शक या भगवान मत बनाइए।

यह समझना बेहद ज़रूरी है कि उनका काम मनोरंजन करना और विज्ञापन करना है, जिसके लिए उन्हें मोटी रकम मिलती है। वे एक बिजनेसमैन की तरह काम कर रहे हैं, इसलिए उनकी कही हर बात को सच मानकर अपनी सेहत, पैसे और मानसिकता को दांव पर मत लगाइए।

निष्कर्ष

जब तक हम आँखें बंद करके इन चमकते चेहरों के पीछे भागते रहेंगे, तब तक ये हमें गुमराह करके अपनी जेबें भरते रहेंगे। अगली बार जब आप किसी स्टार को किसी चीज़ का प्रचार करते देखें, तो खुद से एक सवाल ज़रूर पूछें—"क्या यह सच में इस चीज़ का इस्तेमाल करता होगा?" आपका विवेक ही आपको इस झूठे मायाजाल से बचा सकता है।

अंगारा लाल

Content Creator & Artist

Share

Comments (0)

You must be logged in to add a comment.

No comments yet. Be the first to share your thoughts!

Related Articles