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Article Jul 06, 2026 87 views

फिल्म 'सतलुज' पर भारत में क्यों लगा बैन? जानिए दिलजीत दोसांझ की फिल्म के विवाद की पूरी कहानी

फिल्म 'सतलुज' पर भारत में क्यों लगा बैन? जानिए दिलजीत दोसांझ की फिल्म के विवाद की पूरी कहानी

1. भूमिका (Introduction)

 

दिलजीत दोसांझ अभिनीत और हनी त्रेहान द्वारा निर्देशित फिल्म 'सतलुज' 3 जुलाई 2026 को बिना किसी बड़े प्रमोशन के ZEE5 पर रिलीज हुई। लेकिन रिलीज के महज 48 घंटे के भीतर (5 जुलाई को) इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। ज़ी5 ने इसके पीछे "ताजा घटनाक्रमों" (current developments) का हवाला दिया है, जिसने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।

 

2. फिल्म की कहानी क्या है? (What is the story?)

 

यह फिल्म कोई काल्पनिक कहानी नहीं है, बल्कि पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित एक बायोग्राफिकल ड्रामा है।

1980 और 1990 के दशक में पंजाब में उग्रवाद (militancy) के दौर के दौरान, जसवंत सिंह खालरा ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने हजारों अज्ञात शवों का अवैध रूप से अंतिम संस्कार कर दिया था।

उन्होंने अमृतसर और तरनतारन के नगर निगम रिकॉर्ड से सबूत जुटाकर दावा किया था कि लगभग 25,000 लोग रहस्यमय तरीके से गायब कर दिए गए थे।

साल 1995 में खुद जसवंत सिंह खालra का अपहरण कर लिया गया और उनकी हत्या कर दी गई, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर CBI जांच हुई और कई पुलिसकर्मी दोषी पाए गए।

 

3. विवाद और 'बैन' की मुख्य वजहें (Reasons for the Ban/Removal)

 

संवेदनशील विषय (Sensitive Subject Matter): फिल्म पंजाब के इतिहास के सबसे काले और संवेदनशील दौर को दिखाती है। पुलिस प्रशासन और सिस्टम की कार्यप्रणाली पर उठाए गए सवालों के कारण इसे "पॉलिटिकली सेंसिटिव" माना गया।

सेंसर बोर्ड (CBFC) के साथ लंबा विवाद: ओटीटी पर रिलीज होने से पहले यह फिल्म पिछले 3-4 सालों से अटकी हुई थी। पहले इसका नाम 'घल्लूघारा' (Ghallughara) था, जिसे बदलकर 'पंजाब '95' किया गया और अंत में इसका नाम 'सतलुज' रखा गया। सेंसर बोर्ड ने थिएटर्स में रिलीज के लिए इसमें 127 कट्स लगाने को कहा था, जिसमें जसवंत सिंह खालरा का नाम और तरनतारन जैसी जगहों के नाम हटाने की मांग शामिल थी। मेकर्स ने इन कट्स को मानने से इनकार कर दिया और फिल्म को बिना कट्स के सीधे OTT पर रिलीज कर दिया, जिसके बाद यह कार्रवाई हुई।

ओटीटी और सेल्फ-सेंसरशिप का दबाव: भारत में सीधे ओटीटी पर आने वाली फिल्मों के लिए सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट अनिवार्य नहीं है, लेकिन प्लेटफॉर्म्स को 'सेल्फ-सेंसरशिप' कोड का पालन करना होता है। विवाद बढ़ने के डर से ज़ी5 ने इसे भारत में "पॉज" कर दिया है, हालांकि यह विदेशों में (ZEE5 Global पर) अभी भी उपलब्ध है।

 

4. फिल्म जगत और राजनेताओं की प्रतिक्रिया (Reactions)

 

दिलजीत दोसांझ का बयान: दिलजीत ने इंस्टाग्राम लाइव पर आकर कहा कि उन्हें पहले से ही अंदेशा था कि फिल्म को सोमवार सुबह तक हटा दिया जाएगा, इसलिए टीम ने इसका कोई प्रमोशन नहीं किया ताकि फिल्म चुपचाप दर्शकों तक पहुंच सके।

राजनीतिक विरोध: शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने इसे "अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला" और "पंजाब के इतिहास को दबाने की कोशिश" बताया है। वहीं हरभजन सिंह जैसी हस्तियों ने भी फिल्म की तारीफ करते हुए कहा कि "सच को हमेशा के लिए दफनाया नहीं जा सकता।"

 

5. निष्कर्ष (Conclusion)

फिल्म 'सतलुज' का हटाया जाना यह दिखाता है कि भारत में वास्तविक और ऐतिहासिक घटनाओं पर फिल्में बनाना आज भी कितना चुनौतीपूर्ण है। हालांकि आधिकारिक तौर पर सरकार ने इसे सीधे बैन नहीं किया है, लेकिन 'करंट डेवलपमेंट्स' के नाम पर इसे हटाना सेंसरशिप के नए तरीकों पर सवाल खड़े करता है।

अंगारा लाल

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